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प्रक्रिया

पाउडर कोटिंग की प्रक्रियाएं इस्तेमाल हो रही कोटिंग सामग्री के आधार पर विभिन्न प्रकार की हो सकती हैं। हालांकि, इन प्रक्रियाओं को आम तौर पर चार कार्य श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:

सतह की तैयारी एक प्रक्रिया के साथ शुरू होती है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सतह हर प्रकार की गंदगी और तेलों आदि से मुक्त हो। ज़रूरत पड़ने पर तैयारी के अगले चरण के रूप में ब्लास्टिंग की जा सकती है और लंबी अवधि के जंग प्रतिरोध की अपेक्षित क्षमता के आधार पर आयरन फ़ॉस्फ़ेट या ज़िंक फ़ॉस्फ़ेट का उपयोग किया जा सकता है। बहेतर तरीके से चिपकाने के लिए थर्मोप्लास्टिक पाउडरों को प्राइमर की ज़रूरत पड़ती है। चिपकने की क्षमता को बढ़ावा देने वाले तत्वों की पहले से मौजूदगी के चलते थर्मोसेट पाउडरों को प्राइमर की आवश्यकता नहीं होती है। हालांकि कुछ गणों को उभारने के लिए थर्मोसेट पाउडर के साथ भी प्राइमर का उपयोग किया जा सकता है। प्राइमिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली सामग्री, पाउडर कोटिंग के लिए आवश्यक क्योरिंग तापमान के उपयुक्त होनी चाहिए।

पाउडर को लगाने की विधि दो बुनियादी तकनीकों के कई रूपों का मेल है। यह तकनीकें हैं फ़्लूडाइज़्ड बेड और इलेक्ट्रोस्टैटिक स्प्रे। फ़्लूडाइज़्ड बेड मूल पाउडर कोटिंग तकनीक है। यह अब भी थर्मोप्लास्टिक पì#2366;उडरों को लगाने की प्राथमिक तकनीक है। फ़्लूडाइज़्ड बेड तकनीक का इस्तेमाल उन थर्मोसेट पाउडरों को लगाने के लिए भी किया जाता है जहां उच्च बिल्ड की परत की आवश्यकता होती है या फिर जहां कंपोनेन्ट काफ़ी छोटे होते हैं। इलेक्ट्रिकल इन्सुलेशन के लिए बनाए गए थर्मोसेट पाउडर अधिकतर फ़्लूडाइज़्ड बेड तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। पार्ट्स को पाउडर के मेल्टिंग पॉइंट से काफ़ी ऊंचे तापमान तक गर्म किया जाता है। इसके बाद पार्ट्स को कोटिंग पाउडर के “फ़्लूडाइ&#