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कॉइल कोटिंग की प्रक्रिया

कॉइल कोटिंग एक तरल पेंट सिस्टम है जिसमें टॉप कोट, बैक कोट और प्राइमर शामिल हैं। यह रंगों और फ़िनिश की विस्तृत रेंज में उपलब्ध हैं जिन्हें रोल्स की सहायता से स्टील/अल्युमीनियम पर लगाया जा सकता है। इन्हें एक मिनट के भीतर ठीक किया जा सकता है और रीकॉइल करके उपभोक्ता तक पहुंचाया जा सकता है।

बेहतर बनाई गई प्रक्रिया के साथ कॉइल कोटिंग विनिर्माण के पारंपरिक तरीकों की जगह ले रही है। चीज़ों को पेंट करने की पुरानी प्रक्रिया को अब फ़ैला कर तैयार की गई धातु शीट से बदला जा रहा है। निप कोटिंग और डिप कोटिंग के इस्तेमाल में सॉल्वेंट का कम उपयोग होता है और वीओसी घटाने में मदद मिलती है।

 

coil-coating
  1. Aमूल धातु को खोला जाता है

  2. Bकॉइल को सिरों से जोड़ा जाता है

  3. Cएक्युमुलेटर स्टैक

  4. Dधातु की चिकनाई और गंदगी हटाकर, सफ़ाई, धुलाई और रसायनों से प्री ट्रीटमेंट

  5. Eसुखाने वाला अवन

  6. Fप्राइमर यूनिट – एक या दोनों तरफ़

  1. Gक्योरिंग अवन

  2. Hकोटिंग यूनिट – एक या दोनों तरफ़ टॉप कोट लगाया जाता है

  3. Iक्योरिंग अवन

  4. Jलैमिनेटिंग – एक या दोनों तरफ़, या एम्बोसिंग

  5. Kएक्युमुलेटर स्टैक (एक्ज़िट)

  6. Lतैयार धातु की रीकॉइलिंग

 

 

वो क्या है जो कॉइल कोटिंग को पेंटिंग की अन्य प्रक्रियाओं से बेहतर बनाता है?

  • कॉइल कोटिंग पेंट्स को धातु की सपाट स्ट्रिप पर लगाया जाता है।
  • अवन में तेज़ तापमान से गुज़रने के बाद, कम तापमान वाले पानी से ठंडा करके रिकॉइल किया जाता है
  • अंतिम उपयोग के लिए कोट की गई कॉइल्स को खोला, गठित किया और काटा जाता है।
  • पहले पेंट करें और उसके बाद बनाएं.
  • पेंट के अन्य उपयोगों की तुलना में बेहद कम डीएफ़टी पर लगाया जाता है
  • पेंट का लगभग 100% इस्तेमाल, पेंट लगाने की दूसरी प्रक्रियाओं के मुकाबले पेंट का बहुत कम नुकसान
  • कम सॉल्वेंट उत्सर्जन की वजह से पर्यावरण पर कम प्रभाव डाले.
  • तेज़ी से लगाने की सहूलियत के चलते उच्च उत्पादकता.

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